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गोरखपुर शहर में एक युवती का शव बरामद हुआ. इस युवती के शव की कद काठी और उम्र बिलकुल वैसी थी, जैसी इंजीनियरिंग कॉलेज के कमलेशपुरम कॉलोनी इलाके से गायब युवती शिखा दुबे की थी. शिखा के पिता को शव की शिनाख्त करने के लिए बुलाया गया. सभी लोगों ने ये मान लिया की ये लाश शिखा की है. अपनी बेटी की मौत के गम में डूबे पिता राम प्रकाश दुबे ने अपने हाथ बेटी का अंतिम संस्कार किया. पिता ने अपने पड़ोस में रहने वाले दीपू पर शक जताते हुए हत्या का केस दर्ज करा दिया. पर मरने के कुछ दिनों बाद अचानक शिखा दुबे एक दिन जिंदा सामने आई तो पिता के होश उड़ गए. ये मामला, 2011 का है. पुलिस-मीडिया ने इस घटना को शिखा दुबे हत्याकांड नाम दिया. शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस अपनी तहकीकात में लग गई.

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पुलिस को अपने मुखबिरों से ये खबर मिली की दीपू सोनभद्र में छुपा हुआ है. पर दीपू को पकड़ने सोनभद्र पहुंचकर पुलिस टीम के सामने जो नजारा सामने आया वह हैरान कर देने वाला था. सोनभद्र में पुलिस को न केवल दीपू, बल्कि शिखा भी ज़िंदा मिली. पुलिस की पूछताछ में जो कहानी सामने आई उसे सुनकर गोरखपुर के डीआईजी रहे मुकेश बाबू शुक्ला भी हैरान रह गए थे. जब पुलिस की टीम शिखा को ज़िंदा वापस लेकर लौटी तब डीआईजी को यकीन हुआ की सच में शिखा जिंदा है. इस हैरतअंगेज सनसनीखेज कहानी में पांच लोग थे. पर इस कहानी के मुख्य किरदार है शिखा (23) और पड़ोसी दीपू (26) जब दीपू ने पहली बार शिखा को देखा तो दोनों के दिलों में मुहोब्बत की चिंगारी भड़क उठी. पर इनके परिवार वाले इनकी शादी के लिए तैयार नहीं थे इसलिए इन्होने पूरा जाल बिछाया.

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दीपू और शिखा एक होने के लिए घर से भागने और भागने के बाद घर में होने वाले बवाल से बचने के लिए एक खतरनाक साजिश रच चुके थे. दोनों ने ये तय किया की शिखा की तरह कद काठी वाली किसी महिला को मारकर उसे शिखा की पहचान दे दी जाए. इस साजिश में दीपू और शिखा के अलावा तीसरा किरदार सुग्रीव (35) था. सुग्रीव दीपू का दोस्त था. दीपू का ट्रांसपोर्ट का बिज़नेस था. वो अक्सर कारोबार के सिलसिले में सोनभद्र जाता रहता था. सोनभद्र में दीपू को एक ऐसी लड़की दिखाई दी जो बिलकुल शिखा की तरह लगती थी. इस लड़की का नाम था पूजा. पूजा की तीन साल की बच्ची भी थी और वो जरूरतमंद भी थी. साजिश के तहत दीपू-सुग्रीव मिलकर पूजा को नौकरी के बहाने गोरखपुर ले आये. 10 जून को पूजा सुग्रीव के साथ ट्रक से कूड़ाघाट आई.

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उधर शिखा अपने घर से दीपू के साथ भागकर कुसम्ही जंगल पहुंच गई. जंगल पहुँच कर इन लोगों ने ट्रक में बैठी पूजा को शिखा के कपडे पहना दिए. इसके अलावा पूजा के गले में एक धागा डाला गया जो शिखा हमेशा पहनती थी. इसके बाद ट्रक में ही पूजा को मार दिया गया.इस हत्या में पांचवा किरदार था ट्रक के खलासी बलराम का…बलराम पैसो के लालच में इस हत्याकांड में शामिल हो गया. पूजा की हत्या करने के बाद सबने मिलकर पूजा की लाश का चेहरा बिगाड़ दिया जिससे उसकी असल की पहचान ना हो सके. इसके बाद सभी ने मिलकर पूजा की लाश को सिंघड़िया के पास लाकर दिया. दीपू को इस हत्या का मुख्य आरोपी बनाते हुए पुलिस ने शिखा और दीपू को जेल भेज दिया, अभी शिखा और दीपू जमानत पर रिहा हो गए. पूजा हत्याकांड का केस अभी अदालत में चल रहा है